सरकारी दस्तावेजों से फोटो हटाने के बाद अब दीनदयाल के नाम की योजना बंद
मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के आरएसएस की शाखा में जाने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी वचन के साथ सत्ता में आई कांग्रेस ने सरकारी कामकाज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेताओं के लिए पूज्य जससंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय को बेदखल करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ उद्घोष की तर्ज पर कोई दंभोक्ति करने के बजाए सधे अंदाज में सरकार से भाजपा के वैचारिक अधिष्ठान को तिलांजलि देने की मुहिम छेड़ दी है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहला प्रहार दीनदयाल पर ही हुआ है।
कमलनाथ सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर बनी वन
विभाग की दीनदयाल वनांचल सेवा योजना को बंद कर दिया है। इसके लिए वित्त विभाग की
आपत्ति को कारण बताया गया। यह योजना 2016 में जब बनी और शुरू की गई थी तब कहा गया
था कि वन विभाग की अपनी स्कीमों से ही इसके लिए फंड जुटाया जाएगा। पहले साल विभाग
ने अपने स्तर पर ही पांच करोड़ से ज्यादा रुपए वनांचल में रहने वाले आदिवासियों की
सेवा पर खर्च किए। दूसरे साल के लिए वित्त विभाग से फंड मांग लिया। यह और बात है
कि दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर शुरू की गई इस सेवा योजना पर तत्तकालीन वन मंत्री
डॉ. गौरीशंकर शेजवार की स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त धर्मपत्नी डॉ. किरण शेजवार
को उपकृत करने के आरोप लगे।
योजना की तथाकथा और इसको लेकर नई सरकार द्वारा कराई
जाने वाली जांच पड़ताल अपनी जगह। दीनदयाल वनांचल सेवा योजना को बंद करना कांग्रेस
के उस मिशन का पहला कदम है, जो भाजपा की आम जनता में गहरी होती जड़ों को काटने के
लिए सत्ता के साथ शुरू हुआ है। दीनदयाल उपाध्याय की घर-घर तक पैठ बनाने के लिए
भाजपा और संघ की योजना के तहत सरकारी स्कीमों में उनका नाम जोड़ा गया था। पंद्रह
साल की भाजपा सरकार से पहले सत्ता में कभी दीनदयाल उपाध्याय की इस कदर भागीदारी
नहीं थी। प्रदेश में ही उनके नाम पर दर्जनों योजनाएं शुरू की गईं। पुरानी योजनाओं
का नाम बदल कर उन्हें दीनदयाल मय किया गया। पांच रुपए में भोजन उपलब्ध कराने
दीनदयाल रसोई योजना, गांवों में मोबाइल अस्पताल के लिए दीनदयाल चलित चिकित्सालय,
दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना आदि-इत्यादि। यहां तक कि दीनदयाल उपाध्याय के जन्म
शताब्दी वर्ष 2017 में सभी सरकारी दस्तावेज और वेबसाइट में दीनदयाल का चित्र लगाया
गया था। दीनदयाल का लोगो दिसंबर 2018 तक सरकारी लेटरहेड और वेबसाइटों में चमकता
रहा। सरकार बदली तो मौखिक आदेश पर उन्हें गायब किया गया। सूत्र बताते हैं कि जल्दी
ही दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर चुनावी लाभ लेने के लिए शुरू की गई कई और योजनाओं
का पोस्टमार्टम किया जाएगा। जो योजनाएं जरूरी होंगी उन्हें नए नाम के साथ चलाया
जाएगा और अनुपयोगी योजनाएं दीनदयाल वनांचल सेवा योजना की गति को प्राप्त होंगी।
अपने आराध्य और एकात्म मानववाद के प्रणेता दीनदयाल जी की इस तरह बेदखली भाजपा को
खल सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता सैय्यद जाफर ने वनांचल योजना की जांच कर दोषियों पर
कार्रवाई की बात कही है, वहीं भाजपा को दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाने पर ही एतराज
है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि दीनदयाल जी के नाम की योजना
को बंद करने का आशय है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की उपेक्षा। भाजपा
इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर संचालित योजनाओं को बंद
करने का विरोध करेगी।

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