Friday, November 16, 2018

कमलनाथ की पाती और संस्कारी कांग्रेस!



विधानसभा चुनाव की तकरार चरम पर आने के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की अपने प्रत्याशियों और पार्टीजनों को लिखी गई एक पाती सार्वजनिक हुई है। पाती क्या है, चुनाव प्रचार की कमलनाथ द्वारा तैयार आचार संहिता है। यह आचार संहिता उस दौर में सामने आई जब खुद कमलनाथ जाति और धर्म विशेष को लेकर बंद कमरे में हुई अपनी बातचीत के वायरल होने से मुश्किल में आ गए हैं। वे कांग्रेसियों से उस सनातनी महाभारतकालीन तरीकों से चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं, जिनका प्रयोग कई चुनाव पहले ही बंद हो चुका है।
 कमलनाथ ने अपनी चिट्ठी के जरिए उस स्वच्छ और पवित्र राजनीति को आत्मसात करने की अपील की है, जो आज के दौर में विलुप्त हो चुकी है। नाथ ने कहा है कि कांग्रेस में घृणा फैलाने और दूसरों को अपमानित करने की जगह नहीं है। उन्होंने पार्टीजनों से चुनाव के दौरान छह बिंदुओं पर सतर्कता बरतने को कहा है। ये बिंदु हैं-
  •         कोई भी कांग्रेस नेता धर्म और जाति से संबंधित किसी तरह की बातचीत,भाषण या मीडिया से चर्चा नहीं करेगा। विशेषकर जो धार्मिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील विषय सर्वोच्च
    न्यायालय में लंबित हैं, उन पर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।
  •      ज्यों-ज्यों चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है  कांग्रेस का प्रमुख प्रतिद्वंदी दल भाजपा अपनी हार  सुनिश्चित जानकर तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है, उनसे  सावधान रहें।
  •            किसी भी प्रतिद्वंदी पार्टी के नेताओं पर अनर्गल और असंसदीय या अपमानजनक भाषा में  टिप्पणी नहीं करें।
  •         बिना प्रमाण के कोई भी नेता किसी प्रतिद्वंदी  पार्टी पर आरोप नहीं लगाए।
  •         भाजपा चुनाव में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के  हथकंडे अपना सकती है। कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच रह कर समाज   को बांटने वाली ताकतों द्वारा फैलाए जाने वाले भ्रम और अफवाहों से मुकाबला करने के लिए तैयार रहें।
  •        यदि किसी तरह के संविधान विरोधी हथकंडे,  दूसरे दलों  द्वारा चुनाव में उपयोग करते देखें   तो तत्काल जिले और प्रदेश के चुनाव अधिकारियों के संज्ञान में लाएं। कांग्रेसजन ऐसी कोई भी गतिविधि न करें जिससे आम जनता या लोगों को असुविधा हो।
कमलनाथ द्वारा दीपावली के मौके पर भेजी गई यह चिट्ठी आज उजागर हुई है। यह खत तब सामने आया है जब एक धर्म विशेष के लोगों के साथ कमराबंद बैठक में कमलनाथ द्वारा कही गई बातों का वीडियो चुनाव आयोग के दरवाजे पर शिकायत के साथ पहुंच चुका है। हालांकि नाथ कैंप का दावा है कि उन्होंने कोई अनर्गल बात नहीं कही थी, वो तो सिर्फ समझाइश दे रहे थे। दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीता है वाली स्टाइल में कमलनाथ की कांग्रेसियों से संस्कारी चुनाव लड़ने की यह अपील आरएसएस को लेकर उसके वचनपत्र में कही गई घोषणा को भाजपा द्वारा मनचाहा रुप देकर विवादित करने का भी नतीजा हो सकता है। बहरहाल जब चुनाव में दोनों दलों के बड़े नेता मंच पर बाहें चढ़ा कर एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का कोई मौका नहीं चूकते तब कमलनाथ की कांग्रेस संस्कारवान बन कर 2018 की जंग जीतने उतरेगी!
कमलनाथ की इस पाती के बाद तो उनके चालीस सवाल भी बेमानी साबित हो सकते हैं, जिनमें से कुछ तो पुख्ता प्रमाण और जांच रिपोर्ट के बिना ही हुए हैं। शिवराज को घेरने वाली कांग्रेस की व्यापमं से लेकर ई-टेंडरिंग जैसे घोटालों को जनता के बीच उछालने की तैयारी भी बिना प्रमाण प्रतिद्वंदी पर आरोप नहीं लगाने की लक्ष्मणरेखा से बंध जाएगी। जब चुनाव में गाय, गंगाजल और राम मंदिर जैसे मुद्दे उछल रहे हों तब किसी धार्मिक मामले पर नहीं बोलने का प्रतिबंध कायम रख पाना क्या कमलनाथ और कांग्रेस के लिए संभव होगा। भाजपा और शिवराज तो कांग्रेस की हर गलती या बयान का भरपूर चुनावी फायदा लेने के लिए उतारू बैठे ही हैं। शिवराज के निशाने पर रोज कांग्रेस के बयान ही होते हैं। फिर चाहे वो कमलनाथ का महिलाओं को सजावट के फूल बताने वाला बयान हो या धर्म विशेष के लोगों द्वारा कांग्रेस को वोट देने की बात।
कमलनाथ ने उम्मीद जताई है कि उनके नेता और कार्यकर्ता पार्टी के इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। यानी संस्कारी ढ़ंग से चुनाव लड़ेंगे। कमलनाथ को ध्यान रखना चाहिए कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान प्रभात झा भी कुछ इसीतरह संस्कारी हुए थे। उन्होंने 40 बिंदुओं का शुचिता फार्मूला दिया था, बाद में आरोप लगे कि खुद अध्यक्ष ने ही शुचिता संस्कार नहीं माने।


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