मोदी को दिखी मैक्सिमम प्रोग्रेस तो नाथ को मिनिमम विकास
विधानसभा चुनाव अभियान पर मध्यप्रदेश आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और जुमला पटक दिया है। अंग्रेजी और हिंदी शब्दों की बाजीगरी की अपनी कला का उम्दा प्रदर्शन करते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश का नया अर्थ लोगों को बताया है- मैक्सिमम प्रोग्रेस। मैक्सिमम प्रोग्रेस यानी अधिकतम उन्नति। मध्यप्रदेश के इस नए शब्द संस्कार के साथ नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार को एक बार फिर विकास के उस मुद्दे की तरफ मोडऩे की कोशिश की है, जिसके सहारे वे 2019 आमचुनाव की वैतरणी पार करना चाहते हैं।
अभी तक भाजपा के प्रचार के
केंद्र में 'महाराज’ थे तो
कांग्रेस के मुद्दे 'झूठे वादे’ और 'गुस्सा’
आधारित रहे। मोदी के मैक्सिमम के जवाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
कमलनाथ ने मध्यप्रदेश का नया अर्थ बताया है- भाजपा राज में मिनिमम (न्यूनतम)
प्रोग्रेस। मोदी कांग्रेस पार्टी को चुनौती देते हुए कहते हैं- 55 साल में
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश को जितना दिया, हमने 15 साल में
उससे कई गुना ज्यादा दिया है। मोदी को 2003 के चुनाव के दौरान सड़क को लेकर भाजपा
के लगभग हर बड़े नेता द्वारा सुनाया गया जुमला फिर याद आया कि सड़क देख कर ही पता
चल जाता था, मध्यप्रदेश आ गया है।
कमलनाथ के तरकश में
घोषणाओं, झूठे वादों, अपराध, दुष्कर्म,
किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार
और अवैध उत्खनन में हुई मध्यप्रदेश की मैक्सिमम तरक्की है। कमलनाथ का दावा है कि
प्रदेश में विकास की प्रोग्रेस मिनिमम से भी मिनिमम है।
अधिकतम और न्यूनतम विकास की इस नई बहस में अब
एक बार फिर दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान की बिजली, सड़क और
पानी की स्थिति का खाका सामने आए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। विकास के सपने
दिखाती भाजपा के पास गिनाने के लिए भले ही बहुत कुछ हो, कांग्रेस
के पास भी कमियां बताने के लिए कम मुद्दे नहीं हैं। सवा सात करोड़ की आबादी और तीन
लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रदेश में महज डेढ़ दशक में कायापलट करने
का दावा हजम होने वाला नहीं है। फिर मोदी सरकार के ही नीति आयोग से लेकर विभिन्न
एजेंसियों ने कुपोषण, महिला अपराध, विकास के
मामले में पिछड़ेपन आदि को लेकर अपनी रिपोर्ट में मध्यप्रदेश की जो स्थिति
रेखांकित कर रखी है वह मैक्सिमम प्रोग्रेस के मोदी के दावे से कतई मेल नहीं खाती। मिनिमम प्रोग्रेस का कमलनाथ का तंज भी मुफीद नहीं बैठता है। विकास तो हुआ है। किसी
विकासशील राज्य में विकास तो होता ही है, लेकिन उसकी
रफ्तार सरकार की मंशा और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करती है।
चुनावी दावे और
जुमलेबाजी अपनी जगह। मध्यप्रदेश में डेरा जमाए बैठे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता
संबित पात्रा के पास भी विज्ञापन में दिखाई जा रही उस चमचमाती सड़क को लेकर पूछे जाने
वाले सवालों के जवाब नहीं हैं, जिसको लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज
करा रखी है। यह सड़क किस जिले में है या मध्यप्रदेश से गुजरने वाला कौन सा
राष्ट्रीय या राजमार्ग है? सवाल सुनते ही मैक्सिमम बोलने वाले
प्रवक्ताजी भी मिनिमम वाइस के साथ इधर-उधर हो जाते हैं।

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